घर से महज 50-100 मीटर दूर हो रही ब्लास्टिंग, भुरकुंडा में पत्थरों की बारिश से मकानों को नुकसान
रामगढ़: सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र की भुरकुंडा स्थित संगम माइंस में कथित हैवी ब्लास्टिंग ने आसपास रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उछलकर घरों पर गिरने से आधा दर्जन से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस घटना में दो लोग घायल भी हुए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ब्लास्टिंग से पहले उन्हें न तो सायरन बजाकर और न ही किसी अन्य माध्यम से सूचना दी जाती है। संगम माइंस में बीएलए आउटसोर्सिंग कंपनी की ओर से कोयला और ओवरबर्डन (ओबी) हटाने का काम किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन के दौरान लगातार भारी ब्लास्टिंग की जा रही है। इससे उड़ने वाले पत्थर आसपास के घरों पर गिर रहे हैं। कई मकानों की शीट वाली छतें टूट गई हैं, जबकि कुछ घरों की दीवारों में दरारें आने की शिकायत है। ग्रामीणों के अनुसार, खदान से उनके घरों की दूरी महज 50 से 100 मीटर के आसपास है। ऐसे में ब्लास्टिंग के दौरान उन्हें और उनके परिवारों को हर समय अनहोनी का डर सताता रहता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हैवी ब्लास्टिंग से पहले किसी तरह की चेतावनी नहीं दी जाती। न सायरन बजाया जाता है और न ही लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए समय दिया जाता है। ग्रामीणों ने डीजीएमएस के सुरक्षा मानकों और खनन से जुड़े नियमों के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी और सीसीएल प्रबंधन के सामने कई बार समस्या रखी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। लगातार बातचीत और आश्वासन के बावजूद हालात में बदलाव नहीं हुआ है। घटना की जानकारी मिलने पर भुरकुंडा कोयलांचल बेरोजगार संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं मुखिया अजय पासवान, प्रेम विश्वकर्मा, मुकेश पांडेय और इम्तियाज अहमद ग्रामीणों से मिलने पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। अजय पासवान ने कहा कि कंपनी प्रबंधन के साथ पहले भी हैवी ब्लास्टिंग पर रोक, पुनर्वास, रोजगार और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर बातचीत की गई थी। उस समय आश्वासन तो मिला, लेकिन धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनके मुताबिक, मौजूदा घटना उसी अनदेखी का नतीजा है। मीडिया की ओर से बीएलए कंपनी के अधिकारियों से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी कारणवश बातचीत नहीं हो सकी। ऐसे में ब्लास्टिंग की प्रक्रिया, सुरक्षा इंतजामों और ग्रामीणों की शिकायतों पर कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ पाया है। फिलहाल प्रभावित ग्रामीणों ने कंपनी और सीसीएल प्रबंधन से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने, ब्लास्टिंग से पहले सूचना देने और क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। मामले में प्रशासन और संबंधित खनन सुरक्षा प्राधिकारियों की जांच के बाद ही नुकसान और जिम्मेदारी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।घरों की छतें टूटीं, दीवारों में आई दरार
ग्रामीणों ने सुरक्षा इंतजामों पर उठाए सवाल
बेरोजगार संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से की मुलाकात
कंपनी प्रबंधन का पक्ष नहीं मिल सका














