सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर भरतपुर आंगनबाड़ी में बच्चों को परोसी गई हल्दी वाली खिचड़ी पोषाहार की गुणवत्ता पर उठे सवाल
राजनगर सरायकेला-खरसावां
जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत गेंगेरूली पंचायत के भरतपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र
में बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
केंद्र में करीब 16
बच्चों का नामांकन दर्ज है, लेकिन स्थानीय लोगों
के अनुसार रोजाना महज दो से चार बच्चे
ही केंद्र पहुंचते हैं। वहीं, बच्चों की उपस्थिति
दर्ज करने वाले रजिस्टर में भी अनियमितता की बात सामने आई है।शनिवार को जब आंगनबाड़ी
केंद्र का जायजा लिया गया तो वहां दो बच्चे भोजन करते नजर आए। बच्चों को खिचड़ी
परोसी गई थी, जिसमें मुख्य रूप से चावल और हल्दी ही नजर आ रही थी। खिचड़ी
में सब्जी अथवा अन्य खाद्य सामग्री दिखाई नहीं दी। भोजन की स्थिति को देखकर
पोषाहार की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। कम
बच्चों की उपस्थिति का दिया हवाला मामले में जब आंगनबाड़ी केंद्र की
संचालिका से बच्चों की उपस्थिति और भोजन के संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने
बताया कि शनिवार को बच्चों के लिए हल्दी वाली खिचड़ी बनाई गई थी। खिचड़ी में सब्जी
या अन्य सामग्री नहीं होने को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने बच्चों की कम उपस्थिति
का हवाला दिया और बताया कि कम बच्चे आने के कारण इसी तरह का भोजन बनाया गया। रजिस्टर
में उपस्थिति को लेकर भी सवाल केंद्र में बच्चों के नामांकन के
मुकाबले वास्तविक उपस्थिति कितनी है,
इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया
कि सितंबर माह के उपस्थिति रजिस्टर में बच्चों की उपस्थिति दर्ज नहीं मिली। ऐसे
में सवाल है कि केंद्र में नामांकित बच्चों की वास्तविक उपस्थिति कितनी है और उनके
नाम पर मिलने वाले पोषाहार का वितरण किस आधार पर किया जा रहा है। सीडीपीओ
से नहीं मिल सका विभागीय पक्ष मामले को लेकर राजनगर की सीडीपीओ से
विभागीय पक्ष जानने का प्रयास किया गया। हालांकि,
कार्यालय पहुंचने पर दरवाजा बंद मिला।
पूछताछ करने पर सीडीपीओ ने खाना खाने की बात कहते हुए करीब दो घंटे बाद आने को
कहा। इसके चलते तत्काल उनका पक्ष नहीं मिल सका।आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य
छोटे बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ उनके स्वास्थ्य और प्रारंभिक
विकास को सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि पोषाहार की गुणवत्ता में कमी या सरकारी
रिकॉर्ड के संधारण में अनियमितता की शिकायत सामने आती है, तो इसकी निष्पक्ष
जांच जरूरी है।भरतपुर आंगनबाड़ी केंद्र की यह स्थिति न केवल संबंधित केंद्र की
व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि राजनगर प्रखंड के अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों में भी
पोषाहार की गुणवत्ता और उपस्थिति रजिस्टर की नियमित निगरानी की जरूरत को सामने
लाती है।















