जमशेदपुर: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। रविवार को जमशेदपुर के सर्किट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मरांडी ने सरकार की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल हालिया हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि यदि अब पूरी परीक्षा प्रक्रिया को दूषित बताया जा रहा है, तो पहले अदालत के सामने सभी तथ्य क्यों नहीं रखे गए।

मरांडी ने इस मामले की स्वतंत्र सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार के अलग-अलग समय पर सामने आए पक्षों में अंतर को स्पष्ट किया जाना चाहिए और यह भी जांच होनी चाहिए कि पहले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ी थी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, मरांडी ने सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

पहले की जांच और मौजूदा दावों पर सवाल

बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक गड़बड़ी थी, तो शुरुआती जांच में इसे उसी रूप में सामने क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि पहले अदालत के समक्ष दाखिल हलफनामों में क्या सभी तथ्य रखे गए थे।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पहले की CID जांच में पेपर लीक की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई थी, जबकि बाद की जांच में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कथित पेपर लीक के पहलू की भी जांच की जा रही है। मामले में जांच एजेंसियां अलग-अलग बिंदुओं पर पड़ताल कर रही हैं।

CID की जांच पर भी उठाए सवाल

मरांडी ने CID की जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाया और पूछा कि इतनी बड़ी कथित अनियमितता क्या शीर्ष स्तर की जानकारी के बिना संभव थी। ये सवाल फिलहाल मरांडी के राजनीतिक आरोप और मांग के रूप में सामने आए हैं।

प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को हटाने की मांग

बाबूलाल मरांडी ने प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को JSSC से हटाने की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने मनोज कौशिक को CID के ADG पद से हटाने की मांग की है।

उन्होंने अनुराग गुप्ता समेत उन अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच की मांग की, जो कथित अनियमितता वाली भर्ती प्रक्रिया या उससे जुड़ी जांच के दौरान जिम्मेदार पदों पर रहे। मरांडी का कहना है कि जांच में साक्ष्य मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य का मामला

मरांडी ने कहा कि JSSC-CGL विवाद का असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है। ऐसे में जांच ऐसी होनी चाहिए जिस पर अभ्यर्थियों और आम लोगों का भरोसा कायम हो।

फिलहाल मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ जांच भी जारी है। झारखंड हाईकोर्ट में JPSC और JSSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश की नियुक्ति की जानकारी भी सामने आई है।

संवाददाता सम्मेलन में पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां, भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिन्हा, भाजपा के प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक राजेश शुक्ला और मीडिया प्रभारी प्रेम झा समेत अन्य नेता मौजूद थे।