पाकुड़ (अमड़ापाड़ा): खरीफ सीजन के चरम दौर में अमड़ापाड़ा प्रखंड में किसानों को महंगे दाम पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि सरकारी निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की अनदेखी करते हुए उर्वरकों की खुलेआम ऊंची कीमत पर बिक्री की जा रही है। इससे खेती की लागत बढ़ गई है और किसानों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है।

यूरिया और NPS खाद की अधिक कीमत वसूलने का आरोप

स्थानीय किसानों के अनुसार, 45 किलोग्राम नीम-कोटेड यूरिया, जिसकी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹266.50 प्रति बोरी निर्धारित है, उसे ₹400 प्रति बोरी तक बेचा जा रहा है।

इसी तरह 50 किलोग्राम NPS (20:20:0:13) खाद, जिसकी कंपनीवार अधिकतम सरकारी खुदरा कीमत लगभग ₹1350 प्रति बोरी बताई गई है, उसकी बिक्री ₹2200 प्रति बोरी तक किए जाने का आरोप लगाया गया है।

खेती के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों का कहना है कि उनके पास अधिक कीमत देकर खाद खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

कार्रवाई नहीं होने से बढ़े दुकानदारों के हौसले

किसानों का आरोप है कि मांग बढ़ते ही कई दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूल रहे हैं। उनका कहना है कि खुलेआम अधिक कीमत पर बिक्री होने के बावजूद कृषि विभाग की ओर से प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं होने से दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं।

क्या कहते हैं नियम?

उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के अनुसार—

प्रत्येक उर्वरक विक्रेता के पास वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है।
दुकान पर सभी उर्वरकों का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) प्रदर्शित करना आवश्यक है।
उसी निर्धारित मूल्य पर बिक्री की जानी चाहिए।
प्रत्येक बिक्री पर किसान को रसीद देना अनिवार्य है।
निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली, बिना रसीद बिक्री, कृत्रिम कमी पैदा करना या खाद के साथ अन्य सामान खरीदने के लिए बाध्य करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

लाइसेंस रद्द होने तक की कार्रवाई का प्रावधान

उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत तय दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध जांच के बाद लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

जांच का निर्देश: जिला कृषि पदाधिकारी

इस मामले में जिला कृषि पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने कहा कि खाद एवं यूरिया की बिक्री की निर्धारित दर पहले ही जारी की जा चुकी है। तय मूल्य से अधिक दर पर बिक्री की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है।

उन्होंने बताया कि संबंधित प्रखंड कृषि पदाधिकारी को जांच का निर्देश दिया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी दुकानों का निरीक्षण कर पूरे मामले की जांच करेंगे। जांच में यदि अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।