देवघर जिले के चितरा से आज एक बड़ी खबर सामने आई है जहाँ 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के बैनर तले एसपी माइन्स चितरा कोलियरी के मजदूरों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।सुबह करीब 6 बजे से ही मजदूरों ने कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया। अगले तीन घंटों तक कोलियरी परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। न तो कोयला उत्पादन हुआ और न ही परिवहन से जुड़ी गाड़ियाँ चलीं। संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के नेतृत्व में मजदूरों ने एकजुटता का परिचय देते हुए सरकार की श्रम नीतियों का विरोध किया।हड़ताल की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर मुस्तैद नजर आई। प्रदर्शन कर रहे कई आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर थाने ले जाया। हालांकि पुलिस कार्रवाई के बावजूद मजदूरों का उत्साह और आक्रोश कम नहीं हुआ। वहीं कोलियरी प्रबंधन मजदूरों को समझाने और स्थिति को संभालने में जुटा रहा।इस दौरान मजदूर नेता पशुपति कोल ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि श्रम विरोधी कानून मजदूरों को गुलाम बनाने का प्रयास हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल सांकेतिक है और यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे आंदोलन और तेज होगा।इस आंदोलन में युधिष्ठिर यादव बलदेव महतो, पूरन प्रसाद सिंह होपना मरांडी समेत सैकड़ों मजदूर शामिल रहे। खास बात यह रही कि सजनी किस्कू और छबानी मरांडी जैसी महिला श्रमिकों ने भी बढ़-चढ़कर आंदोलन में भाग लिया और अपनी आवाज बुलंद की।चितरा कोलियरी में हुई इस बंदी ने यह साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में श्रम कानूनों को लेकर सरकार और मजदूर संगठनों के बीच टकराव और गहरा सकता है। फिलहाल पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा है लेकिन मजदूरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं संघर्ष जारी रहेगा।