कैंसर आज दुनिया की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक माना जाता है। इस बीमारी का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है क्योंकि यह धीरे धीरे शरीर को कमजोर कर देता है। लंबे समय तक कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी  रेडिएशन और सर्जरी जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता रहा  लेकिन अब मेडिकल साइंस में एक नई तकनीक तेजी से चर्चा में है  इम्युनोथैरेपी। इम्युनोथैरेपी को कैंसर इलाज की आधुनिक और एडवांस तकनीक माना जा रहा है। यह इलाज शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करता है। इम्युनोथैरेपी एक ऐसा उपचार है जिसमें शरीर की इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय किया जाता है ताकि वे कैंसर सेल्स को पहचानकर खत्म कर सकें। आसान भाषा में समझें तो यह शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को री एक्टिव करने का काम करती है। कई बार कैंसर कोशिकाएं खुद को सामान्य कोशिकाओं की तरह छिपा लेती हैं  जिससे शरीर की टी सेल्स उन्हें पहचान नहीं पातीं। इम्युनोथैरेपी इन बाधाओं को हटाकर इम्यून सिस्टम को दोबारा एक्टिव करती है। शरीर में मौजूद टी सेल्स वायरस और बीमार कोशिकाओं को खत्म करने का काम करती हैं। लेकिन कैंसर कोशिकाएं कुछ ऐसे संकेत भेजती हैं जिससे टी सेल्स भ्रमित हो जाती हैं और हमला नहीं कर पातीं। इम्युनोथैरेपी इस प्रक्रिया को बदलती है। इसमें इस्तेमाल होने वाली दवाएं टी सेल्स पर लगे ब्रेक को हटाने का काम करती हैं ताकि वे कैंसर पर हमला कर सकें। विशेषज्ञों के मुताबिक इम्युनोथैरेपी खासतौर पर कुछ प्रकार के कैंसर में ज्यादा प्रभावी मानी जाती है  जैसे फेफड़ों का कैंसर  स्किन कैंसर  ब्लड कैंसर किडनी कैंसर कुछ एडवांस स्टेज कैंसर  कई मरीजों में इस थेरेपी से लंबे समय तक बीमारी को कंट्रोल करने में मदद मिली है। हर मरीज के लिए इसका असर अलग हो सकता है। हालांकि कई मामलों में इसके साइड इफेक्ट्स कीमोथेरेपी की तुलना में कम देखे गए हैं। कीमोथेरेपी जहां शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित कर सकती है वहीं इम्युनोथैरेपी ज्यादा टारगेटेड तरीके से काम करती है। इम्युनोथैरेपी को सुरक्षित माना जाता है लेकिन कुछ मरीजों में इसके हल्के साइड इफेक्ट्स देखे जा सकते हैं जैसे थकान  बुखार  शरीर में सूजन  त्वचा पर रिएक्शन  कमजोरी  इसी वजह से डॉक्टर की निगरानी में ही यह इलाज किया जाता है। मेडिकल विशेषज्ञ मानते हैं कि इम्युनोथैरेपी कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। यह सिर्फ बीमारी से लड़ने में मदद नहीं करती बल्कि मरीजों को लंबे समय तक बेहतर जीवन जीने की उम्मीद भी देती है।