सारठ/देवघर:  स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सारठ प्रखंड मुख्यालय में हुए झंडोत्तोलन कार्यक्रम को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद गहराता जा रहा है। प्रखंड प्रमुख गौतम रवानी और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) चंदन कुमार सिंह इस मामले में आमने-सामने आ गए हैं। प्रमुख ने जहां प्रखंड प्रशासन पर जनप्रतिनिधियों की गरिमा की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, वहीं BDO ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही है।

मामले को लेकर प्रखंड प्रमुख, पंचायत समिति सदस्यों और मुखिया की एक बैठक सारठ डाक बंगला में हुई, जिसमें स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम और झंडोत्तोलन को लेकर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की गई।

प्रमुख ने उठाया प्रोटोकॉल का सवाल

बैठक के दौरान प्रखंड प्रमुख गौतम रवानी ने आरोप लगाया कि देवघर जिले के 10 प्रखंड मुख्यालयों में से 9 जगहों पर प्रखंड प्रमुख द्वारा झंडोत्तोलन किया गया, जबकि सारठ प्रखंड मुख्यालय में उन्हें दरकिनार करते हुए BDO चंदन कुमार सिंह ने झंडोत्तोलन किया।

प्रमुख ने इसे केवल झंडोत्तोलन का मामला नहीं, बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय बताया।

उनका कहना है कि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को सरकारी कार्यक्रमों में निर्धारित प्रोटोकॉल और परंपराओं के अनुसार सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सारठ में जिस तरीके से कार्यक्रम आयोजित किया गया, उससे जनप्रतिनिधियों की गरिमा प्रभावित हुई है।

जनप्रतिनिधियों की गरिमा से समझौता बर्दाश्त नहीं’

गौतम रवानी ने कहा कि प्रखंड स्तर के सरकारी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले को लेकर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

बैठक में मौजूद पंचायत समिति सदस्यों और मुखिया ने भी पूरे मामले पर चर्चा की और इसे गंभीरता से उठाने की बात कही।

BDO ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

वहीं, प्रखंड प्रमुख के आरोपों पर BDO चंदन कुमार सिंह ने अलग पक्ष रखा है। उन्होंने प्रमुख द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया।

BDO के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित झंडोत्तोलन कार्यक्रम सरकार द्वारा निर्धारित गाइडलाइन और नियमों का पालन करते हुए कराया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी जनप्रतिनिधि की प्रतिष्ठा या सम्मान को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था।

झंडोत्तोलन बना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच विवाद की वजह

स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के कार्यक्रम को लेकर प्रखंड प्रमुख और BDO के बीच सामने आए इस विवाद ने अब सारठ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है।

एक तरफ निर्वाचित जनप्रतिनिधि प्रोटोकॉल और सम्मान का मुद्दा उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रखंड प्रशासन सरकारी दिशा-निर्देशों के पालन की बात कर रहा है।

अब सवाल यह है कि झंडोत्तोलन को लेकर आखिर निर्धारित प्रोटोकॉल क्या कहता है और सारठ में उसका पालन किस तरह हुआ? इसको लेकर आगे प्रशासनिक स्तर पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और विवाद के आगे किस दिशा में जाने की संभावना है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।