‘तालाब के पानी पर सबका अधिकार’ वाले बयान से मांझी ने रखा अपना रुख, JDU अभी प्रावधानों के अध्ययन के पक्ष में
पटना: बिहार में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने UCC का समर्थन करते हुए इसे समानता के अधिकार से जोड़ा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि UCC को लेकर किसी तरह के दांव-पेच की बात करना उनकी समझ में संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। मांझी ने संविधान, समानता और धर्मनिरपेक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी संवैधानिक व्यवस्थाओं को लागू करने के पक्ष में है। उन्होंने तीन तलाक और अनुच्छेद 370 का भी अपने बयान में जिक्र किया। मांझी ने UCC के समर्थन में रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अब तालाब के पानी पर सबका अधिकार होगा और इसे उन्होंने बराबरी के अधिकार से जोड़ा। उन्होंने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति समर्थन भी जताया। UCC को लेकर बिहार में NDA के भीतर अलग-अलग बयान सामने आए हैं। JDU नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि पार्टी पहले UCC के प्रावधानों का अध्ययन करेगी और उसके बाद अपना फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि अगर प्रावधान स्वीकार्य हुए तो पार्टी बिना वजह विरोध नहीं करेगी। इससे पहले JDU नेता श्याम रजक ने बिहार में UCC लागू किए जाने का विरोध किया था। वहीं RJD ने भी UCC के मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया है। यह विवाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद तेज हुआ, जिसमें उन्होंने 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने की बात कही थी। इसके बाद बिहार में NDA के अलग-अलग घटक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। फिलहाल बिहार में UCC को लेकर राजनीतिक दलों के रुख अलग-अलग हैं। JDU ने अंतिम निर्णय से पहले प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन करने की बात कही है, जबकि मांझी ने स्पष्ट रूप से इसका समर्थन किया है।‘तालाब के पानी पर सबका अधिकार’
JDU का रुख अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं
2029 से पहले UCC लागू करने की घोषणा















