EWS आरक्षण, ₹8 लाख सालाना आय सीमा पहली नजर में उचित, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाली
नई दिल्ली: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए निर्धारित ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यह सीमा पहली नजर में उचित प्रतीत होती है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है और मामले की आगे सुनवाई की जाएगी। मंगलवार को जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने 2021 में दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए ओबीसी को 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला वर्ष 2021 के नीट प्रवेश से संबंधित है, जो अब व्यावहारिक रूप से समाप्त हो चुका है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने दलील दी कि ₹8 लाख आय सीमा का मुद्दा अब भी प्रासंगिक है और इस पर न्यायिक निर्णय आवश्यक है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि पांडे समिति ने ₹8 लाख आय सीमा को बनाए रखने की सिफारिश की थी, लेकिन साथ ही यह सुझाव दिया था कि पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि रखने वाले परिवारों को, उनकी आय चाहे जो भी हो, ईडब्ल्यूएस श्रेणी से बाहर रखा जाए। केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने समिति की इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस आलोक अराधे ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा पहली नजर में उचित लगती है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतिम निर्णय नहीं है। पीठ ने मामले में उठाए गए सभी कानूनी प्रश्नों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ता को संबंधित मुद्दों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने को कहा। अदालत ने सहायक सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से भी सहायता मांगी और संबंधित सभी याचिकाएं रिकॉर्ड पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने 2021-22 के नीट प्रवेश में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी आरक्षण को जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन यह भी कहा था कि ₹8 लाख आय सीमा की वैधता पर अंतिम फैसला बाद में किया जाएगा। इसलिए फिलहाल इस आय सीमा की संवैधानिक वैधता पर अंतिम निर्णय आना बाकी है।















