शिकागो:  भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8 प्रतिशत की मजबूत GDP वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, इस आर्थिक प्रदर्शन को लेकर इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने विकास की गुणवत्ता और उसके लाभ के समान वितरण पर सवाल खड़े किए हैं।

31 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत थी। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत और निवेश यानी ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

सैम पित्रोदा ने पूछा- आखिर किसके लिए है यह ग्रोथ?

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में सैम पित्रोदा ने GDP के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए विकास के लाभ को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सिर्फ GDP बढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि इस आर्थिक वृद्धि का फायदा देश की कितनी आबादी तक पहुंच रहा है।

पित्रोदा ने कहा, “यह किस तरह की ग्रोथ है? क्या यह ग्रोथ बहुत कम लोगों के लिए है या भारत के लोगों के लिए? क्या यह बराबरी वाली ग्रोथ है? क्या इसका फायदा आम लोगों तक पहुंचता है, या हमने कुछ और अरबपति बना दिए हैं?”

उन्होंने रुपये की स्थिति का भी उल्लेख करते हुए इसे एक संकेत बताया। पित्रोदा का कहना है कि आर्थिक विकास का मूल्यांकन केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति और उनके जीवन में हो रहे बदलाव से भी किया जाना चाहिए।

रुपये की स्थिति को बताया चेतावनी का संकेत

पित्रोदा ने रुपये की कमजोर स्थिति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि रुपया लगभग 100 के स्तर के करीब पहुंचना उनके लिए एक संकेत है। उनके मुताबिक, आर्थिक विकास के साथ मुद्रा की स्थिति और आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है।

उनका जोर इस बात पर रहा कि देश में ऐसी आर्थिक वृद्धि होनी चाहिए जिसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे और आर्थिक असमानता कम हो।

सरकार ने GDP आंकड़ों को बताया मजबूत प्रदर्शन

वहीं, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने GDP के इन आंकड़ों को भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन के तौर पर पेश किया है। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को सरकार ने सकारात्मक संकेत बताया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे “हेरक्यूलियन फीट” बताया है। सरकार का कहना है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि भारत की अर्थव्यवस्था की क्षमता और मजबूती को दर्शाती है।

GDP पर सियासी बहस तेज

GDP के आंकड़े सामने आने के बाद आर्थिक विकास को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। जहां सरकार इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास की रफ्तार का प्रमाण बता रही है, वहीं विपक्षी खेमे से विकास के लाभ के समान वितरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सैम पित्रोदा के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने आर्थिक विकास के लाभ के समान वितरण पर उनके सवालों को महत्वपूर्ण बताया, जबकि अन्य लोगों ने उनके बयान को लेकर कांग्रेस की आलोचना की।

सवाल सिर्फ GDP का नहीं, विकास के बंटवारे का भी

GDP वृद्धि के आंकड़ों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार का संकेत जरूर दिया है, लेकिन पित्रोदा के सवाल ने आर्थिक विकास की समावेशिता और समान वितरण को बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि आर्थिक वृद्धि का असर रोजगार, आय और आम लोगों की क्रय शक्ति पर किस स्तर तक दिखाई देता है।