कोलंबो: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंका की अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान बुधवार को कोलंबो में विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत और श्रीलंका के द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सहयोग और आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

प्रेमदासा ने मुलाकात को बताया रचनात्मक और प्रगतिशील

मुलाकात के बाद साजिथ प्रेमदासा ने बैठक को “बहुत रचनात्मक और प्रगतिशील” बताया। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच विशेष और मजबूत संबंध हैं। दोनों देश करीबी साझेदार हैं और शांति, समृद्धि तथा आपसी सामंजस्य को बढ़ावा देने में साझा हित रखते हैं।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को उपहार भी दिए। बातचीत में दोनों देशों के बीच मौजूदा सहयोग को और मजबूत करने तथा आपसी संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया गया।

भारत को बताया ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’

प्रेमदासा ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए उसे श्रीलंका का “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने प्राकृतिक आपदा, आर्थिक संकट और कोरोना महामारी जैसे मुश्किल दौर में श्रीलंका की मदद की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विकास सहायता, आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग और जन-से-जन संबंधों के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है।

संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर

श्रीलंकाई विपक्षी नेता ने कहा कि भारत और श्रीलंका को एक-दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और विस्तार देने की बात कही और भारत को श्रीलंका का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बनाने की इच्छा जताई।

38 साल बाद श्रीलंका पहुंचे भारतीय रक्षा मंत्री

राजनाथ सिंह 8 से 10 सितंबर 2026 तक श्रीलंका की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह करीब 38 वर्षों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की श्रीलंका की पहली आधिकारिक यात्रा है। यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से भी मुलाकात की और भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद किया। उनकी यात्रा में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक एवं रणनीतिक संबंध रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों की भौगोलिक निकटता को देखते हुए रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को भी खास महत्व दिया जाता है।