लोहरदगा में डंपिंग यार्ड बंद होने से सैकड़ों मजदूर बेरोजगार, रोपवे चालू रहने पर भड़का आक्रोश, अध्यक्ष अनिल उरांव ने दी चेतावनी
लोहरदगा: शहर के बीचों-बीच साइडिंग क्षेत्र में वर्षों से संचालित डंपिंग यार्ड के बंद होने के बाद सैकड़ों मजदूरों का रोजगार संकट गहरा गया है। बॉक्साइट की लोडिंग-अनलोडिंग के काम से जुड़े मजदूरों का आरोप है कि डंपिंग यार्ड को बड़की चांपी स्थानांतरित किए जाने के बाद साइडिंग में काम करने वाले मजदूरों के हाथ से रोजगार छिन गया है। वहीं, दूसरी ओर इसी क्षेत्र में रोपवे का संचालन जारी रहने को लेकर हिंडाल्को कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मजदूरों के आग्रह पर लोहरदगा नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव साइडिंग स्थित बंद पड़े डंपिंग यार्ड पहुंचे। उन्होंने पूर्व में यहां काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। मजदूरों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वर्षों से डंपिंग यार्ड में काम कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। डंपिंग यार्ड हटने के बाद उनके सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की मिलीभगत से डंपिंग यार्ड को साइडिंग से हटाया गया, जिसका सीधा असर यहां काम करने वाले मजदूर परिवारों पर पड़ा है। मजदूरों की समस्याएं सुनने के बाद नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव ने सवाल उठाया कि जब साइडिंग में डंपिंग यार्ड बंद हो चुका है तो रोपवे का संचालन किस उद्देश्य से किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि यदि साइडिंग क्षेत्र में डंपिंग यार्ड बंद है और मजदूरों के लिए काम नहीं है, तो उसी व्यवस्था से जुड़े रोपवे को चालू रखना समझ से परे है। उन्होंने कंपनी की कार्यप्रणाली को दोहरी नीति बताते हुए कहा कि मजदूरों के हितों की अनदेखी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। अनिल उरांव ने यह भी कहा कि साइडिंग क्षेत्र में रोपवे के नीचे रहने वाले लोग लगातार भय के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। लोगों को हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उन्होंने बताया कि रोपवे को लेकर पहले भी जनप्रतिनिधियों की ओर से आवाज उठाई जाती रही है और कंपनी से इसके संचालन को बंद करने का आग्रह किया गया, लेकिन इसके बावजूद रोपवे चल रहा था। मामला उस समय और गरमा गया जब 30 अगस्त को नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव सैकड़ों मजदूरों के साथ रोपवे स्थल पहुंचे और रोपवे का संचालन बंद करा दिया। उन्होंने हिंडाल्को कंपनी को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कंपनी साइडिंग का रोपवे चालू रखना चाहती है तो यहां के डंपिंग यार्ड में पूर्व में काम करने वाले सभी मजदूरों को रोजगार देना होगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों को काम दिए बिना रोपवे का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। नगर परिषद अध्यक्ष ने कहा कि कंपनी को स्पष्ट करना होगा कि यदि साइडिंग क्षेत्र में डंपिंग यार्ड की जरूरत नहीं है तो रोपवे क्यों चलाया जा रहा है। वहीं, अगर रोपवे का संचालन जरूरी है तो उससे जुड़े स्थानीय मजदूरों के रोजगार की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि वर्षों तक इस व्यवस्था से जुड़े मजदूरों को अचानक बेरोजगार कर देना और दूसरी तरफ उसी व्यवस्था का संचालन जारी रखना स्थानीय लोगों के साथ न्याय नहीं है। अनिल उरांव ने चेतावनी दी कि यदि हिंडाल्को कंपनी ने मजदूरों की मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों के रोजगार और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के मुद्दे पर कंपनी के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल साइडिंग क्षेत्र में मामला केवल डंपिंग यार्ड के बंद होने तक सीमित नहीं रह गया है। सैकड़ों मजदूरों के रोजगार, रोपवे के संचालन और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि डंपिंग यार्ड बंद है तो रोपवे क्यों चलाया जा रहा है और यदि रोपवे जरूरी है तो उससे जुड़े मजदूरों को रोजगार क्यों नहीं दिया जा रहा।‘डंपिंग यार्ड बंद तो रोपवे क्यों चालू?’
सैकड़ों मजदूरों के साथ रोपवे का संचालन कराया बंद
आंदोलन व्यापक करने की चेतावनी















