कोडरमा: चक्रवात अर्णव के प्रभाव से हुई लगातार बारिश ने कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड स्थित पचखेरो जलाशय में मछली पालन करने वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। लगातार तीन दिनों तक बारिश और बादल छाए रहने के कारण जलाशय में ऑक्सीजन का स्तर कम होने से केज में पल रही करीब 30 से 40 टन मछलियों की मौत हो गई। इस घटना में लगभग 35 मत्स्य किसानों को एक करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि मरी हुई मछलियां बिक्री के लिए पूरी तरह तैयार थीं। अचानक इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत से किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

400 केज में हो रहा था मछली पालन

जानकारी के अनुसार, मरकच्चो प्रखंड अंतर्गत पचखेरो जलाशय में जिला मत्स्य कार्यालय के सहयोग से करीब 30 से 35 किसान 400 केज में मछली पालन कर रहे थे।

इनमें महेश्वरी कुशवाहा, सिकंदर वर्मा, कामदेव वर्मा, मंटू वर्मा, अजीत वर्मा, महेश वर्मा, मुंशी कुशवाहा, राजेंद्र कुशवाहा, महेंद्र कुशवाहा, सोल्टी कुमार और मनोज कुशवाहा सहित अन्य किसान शामिल हैं।

किसानों के अनुसार, लगातार तीन दिनों तक खराब मौसम रहने से केज में पल रही एक से डेढ़ किलोग्राम वजन की तिलापिया मछलियां अचानक मरने लगीं। देखते ही देखते केज में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां जमा हो गईं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और लगाई गई पूंजी पर पानी फिर गया।

पहले जमीन गई, अब आजीविका पर संकट

प्रभावित किसानों ने बताया कि जलाशय निर्माण से पहले वे खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। लेकिन जलाशय निर्माण के कारण उनकी जमीन डूब क्षेत्र में चली गई और उन्हें विस्थापित होना पड़ा।

इसके बाद किसानों ने मछली पालन को अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाया। वर्षों की मेहनत और पूंजी लगाकर उन्होंने मछली पालन का व्यवसाय शुरू किया था। अब बिक्री के लिए तैयार मछलियों की मौत ने उन्हें गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है।

किसानों का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई करना उनके लिए आसान नहीं होगा। उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता तथा उचित मुआवजा देने की मांग की है।

पानी में ऑक्सीजन की कमी से मछलियों की मौत: मत्स्य पदाधिकारी

इस संबंध में जिला मत्स्य पदाधिकारी विजय कुमार सिंह ने बताया कि लगातार तीन दिनों तक बादल छाए रहने और बारिश होने के कारण जलाशय के पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया। इसी वजह से केज में पल रही मछलियों की मौत हुई है।

उन्होंने बताया कि मत्स्य किसानों को हुए नुकसान की जानकारी मिली है।

सरकार से आर्थिक सहायता की मांग

मछलियों की बड़े पैमाने पर मौत के बाद प्रभावित किसान आर्थिक सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द मदद नहीं मिली तो उनके लिए दोबारा मछली पालन शुरू करना मुश्किल हो जाएगा।

पचखेरो जलाशय में हुई इस घटना ने मत्स्य किसानों की आजीविका पर गंभीर असर डाला है। अब प्रभावित परिवारों की निगाहें जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर टिकी हैं।

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