40 पड़हा समिति ने मेले में प्रस्तुत की अपनी सांस्कृतिक पहचान, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और मंत्री चमरा लिंडा बतौर अतिथि हुए शामिल

झारखंड: राज्य के ऐतिहासिक मुड़मा मेले का आयोजन किया गया। मेले में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सभ्यता की अनोखी झलक देखने को मिली। पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान के माध्यम से झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत को प्रदर्शित किया गया।

40 पड़हा समिति ने दिखाई सांस्कृतिक पहचान

मुड़मा मेले में 40 पड़हा समिति ने अपनी विशिष्ट छवि प्रस्तुत की। मेले में आदिवासी समाज की परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक पहचान की झलक देखने को मिली। यह आयोजन झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और सभ्यता को सहेजने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और चमरा लिंडा रहे उपस्थित

कार्यक्रम में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और मंत्री चमरा लिंडा बतौर अतिथि उपस्थित रहे। इसके अलावा मुड़मा मेला के अध्यक्ष जगराम उरांव, कांग्रेस नेता अजय नाथ शाहदेव, धर्मगुरु बंधन तिग्गा सहित कई गणमान्य लोग भी आयोजन में शामिल हुए।

आदिवासी परंपरा और विरासत का प्रतीक है मुड़मा मेला

मुड़मा मेला झारखंड की आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक आयोजन है। मेले के माध्यम से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और सामूहिक एकजुटता की झलक सामने आती है। इस तरह के आयोजन राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

मुड़मा मेले में आदिवासी संस्कृति और झारखंडी सभ्यता की झलक ने आयोजन को खास पहचान दी। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने भी मेले के महत्व को रेखांकित किया।