गुमला: सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर पिछले छह दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-अनशन समाप्त हो गया। सिविल सर्जन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद 21 अक्टूबर 2026 को रात 8 बजे जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया। यह आंदोलन झारखंड प्रदेश प्रतिज्ञा महिला एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष सह प्रदेश सचिव देवकी देवी के नेतृत्व में चल रहा था।

16 अक्टूबर से चल रहा था धरना-अनशन

देवकी देवी के नेतृत्व में 16 अक्टूबर 2026 से सदर अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-अनशन शुरू किया गया था। इस दौरान उन्होंने सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल में चिकित्सकों की कमी दूर करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की थी।

देवकी देवी का कहना था कि गुमला एक आकांक्षी और आदिवासी बहुल जिला है। यहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब मरीजों के लिए सदर अस्पताल प्रमुख सहारा है। लेकिन चिकित्सकों की कमी और जरूरी सुविधाओं के अभाव के कारण मरीजों को परेशानी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि समुचित इलाज नहीं मिलने पर मरीजों को रांची स्थित रिम्स रेफर करना पड़ता है, जिससे उनके परिजनों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है।

17 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन

एसोसिएशन की ओर से अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के लिए 17 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया था। इनमें प्रमुख मांगें शामिल थीं:

·         सदर अस्पताल में रिम्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना और गुमला में रिम्स-2 स्थापित करने की पहल।

·         रात के समय बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित करना और चिकित्सकों की कमी दूर करना।

·         अस्पताल में सभी प्रकार की महंगी जांच की सुविधा उपलब्ध कराना।

·         निजी जांच केंद्रों की ओर से कथित रूप से अधिक राशि वसूलने के मामले की उच्चस्तरीय जांच।

·         खराब एंबुलेंस की मरम्मत और पर्याप्त सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था।

·         108 एंबुलेंस सेवा में सुधार।

·         अस्पताल में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराना।

·         महिला रोग विशेषज्ञों की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता सुनिश्चित करना।

·         सभी ब्लड ग्रुप का रक्त 24 घंटे उपलब्ध रखना।

·         अस्पताल में बेड और वार्ड की संख्या बढ़ाना।

·         अस्पताल में नियुक्त डॉक्टरों के निजी क्लीनिक से जुड़े मुद्दे पर उचित कार्रवाई करना।

·         सांसद मद से लगाई गई एयर प्यूरीफायर मशीनों की मरम्मत और सभी वार्डों में एसी लगाने की व्यवस्था।

·         प्रसव के बाद गर्भवती महिलाओं या उनके परिजनों से कथित रूप से पैसे मांगने की शिकायतों पर रोक लगाना।

लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हुआ अनशन

लगातार छह दिनों तक चले धरना-अनशन के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ वार्ता हुई। इसमें सिविल सर्जन की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि जिला स्तर से संबंधित मांगों पर जल्द काम किया जाएगा। वहीं, राज्य स्तर से जुड़ी मांगों को लेकर सरकार से पत्राचार करने की बात कही गई।

लिखित आश्वासन मिलने के बाद देवकी देवी ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। 21 अक्टूबर की रात करीब 8 बजे उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर होगा आंदोलन

अनशन समाप्त होने के बाद देवकी देवी ने कहा कि उन्हें मांगों के संबंध में लिखित आश्वासन मिला है और उम्मीद है कि जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो एसोसिएशन दोबारा धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगा।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग लिखित आश्वासन के तहत कितनी मांगों पर और कितनी जल्दी कार्रवाई करता है। अस्पताल में बेहतर इलाज, जांच, दवाओं और आपातकालीन सुविधाओं की उपलब्धता स्थानीय मरीजों के लिए अहम बनी हुई है।