JSSC-CGL पास कर बने थे अधिकारी, पहली तनख्वाह से पहले घूसकांड में गए जेल, अब मिली राहत
रांची: सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र मिलने के बाद पहली तनख्वाह का इंतजार कर रहे प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) नंदन कुमार की मुश्किलें अब कुछ कम हुई हैं। नौकरी शुरू करने के कुछ ही समय बाद रिश्वतखोरी के आरोप में जेल पहुंच गए नंदन कुमार को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। JSSC-CGL परीक्षा पास कर सरकारी सेवा में आए नंदन कुमार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। अब हाईकोर्ट के इस आदेश से उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है। मामला इसी साल 19 मार्च का है। साहिबगंज जिले के बरहड़वा में ACB दुमका की टीम ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई की थी। शिकायतकर्ता मोहम्मद आलमगीर की सूचना पर पहुंची टीम ने BSO नंदन कुमार को कथित तौर पर 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद नंदन कुमार को जेल भेज दिया गया था। सरकारी सेवा में उनकी शुरुआत ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच हुई और पहली सैलरी मिलने से पहले उन्हें जेल जाना पड़ा। नंदन कुमार पर आरोप था कि उन्होंने जन वितरण प्रणाली (PDS) के डीलरों से हर महीने पांच हजार रुपये का निश्चित कमीशन वसूलने का तंत्र बना रखा था। इसी कथित वसूली व्यवस्था से जुड़े मामले में ACB ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। इस प्रकरण की सुनवाई दुमका की अदालत में विजिलेंस केस नंबर 04/2026 के तहत चल रही है। मामले में जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने नंदन कुमार को जमानत प्रदान कर दी। इस आदेश के बाद उन्हें मामले में राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।40 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तारी
PDS डीलरों से हर महीने कमीशन वसूलने का आरोप
जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत से मिली राहत















