नई दिल्ली:  बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब समझौते की दिशा में बढ़ गया है। सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल सहित दोनों राज्यों और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बिहार-झारखंड के बीच लंबे समय से था पानी का विवाद

झारखंड के बिहार से अलग होकर अलग राज्य बनने के बाद से ही सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद रहे हैं।

अविभाजित बिहार को 1973 के बानसागर समझौते के तहत सोन नदी से 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी आवंटित किया गया था। झारखंड के गठन के बाद इस पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से समाधान की कोशिश चल रही थी।

अब नए समझौते के तहत पानी के हिस्से का नया फॉर्मूला तय किया गया है।

अब बिहार को 5.75 और झारखंड को 2 MAF पानी

नए समझौते के अनुसार सोन नदी के पानी में:

  • बिहार को 5.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF)
  • झारखंड को 2.00 मिलियन एकड़ फीट (MAF)

पानी मिलेगा।

इस तरह लंबे समय से चले आ रहे विवाद को एक निर्धारित हिस्सेदारी के जरिए सुलझाने की कोशिश की गई है।

तकनीकी समिति की सिफारिश पर तय हुआ फॉर्मूला

पानी के बंटवारे का यह फॉर्मूला केंद्र सरकार की ओर से गठित तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है।

दोनों राज्यों की कैबिनेट से भी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी थी। इसके बाद अब केंद्र की मौजूदगी में MoU पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए।

इंद्रापुरी जलाशय परियोजना को मिल सकती है रफ्तार

इस समझौते को सिर्फ पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इससे सोन नदी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं के लिए भी रास्ता आसान होने की उम्मीद है।

खास तौर पर इंद्रापुरी जलाशय जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं को लेकर लंबे समय से चली आ रही अड़चनों के दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से दोनों राज्यों में सिंचाई, पेयजल और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को भी फायदा मिलने की संभावना है।

बिहार और झारखंड के लिए क्यों अहम है समझौता?

सोन नदी बिहार और झारखंड दोनों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है। इसके पानी का उपयोग सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए किया जाता है।

नए समझौते से दोनों राज्यों के हिस्से को लेकर स्पष्टता आने की उम्मीद है। इससे भविष्य में पानी के बंटवारे को लेकर होने वाले विवादों को कम करने और संयुक्त जल परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। लंबे समय से लंबित इस समझौते को बिहार-झारखंड के बीच जल संसाधन सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।