कौन हैं गुलवीर सिंह? खेतों की पगडंडियों से निकले, सेना में भर्ती हुए और 10,000 मीटर में रचा इतिहास
Asian Games 2026: भारतीय एथलेटिक्स के स्टार लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से आने वाले गुलवीर का सफर गांव की पगडंडियों और खेतों से शुरू हुआ और भारतीय सेना तक पहुंचा। आज वह देश के प्रमुख लॉन्ग-डिस्टेंस रनर्स में शामिल हैं। वर्ल्ड एथलेटिक्स के मुताबिक गुलवीर का जन्म 1 जून 1998 को हुआ था और वह 2026 में 28 साल के हैं। गुलवीर सिंह का शुरुआती जुड़ाव दौड़ से गांव के खेतों और ग्रामीण रास्तों पर हुआ। सेना में भर्ती की तैयारी के दौरान उन्होंने दौड़ को गंभीरता से लेना शुरू किया। 2018 में वह भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट में शामिल हुए और बाद में नायब सूबेदार के पद तक पहुंचे। सेना के जरिए उन्हें खेल प्रशिक्षण की बेहतर सुविधाएं मिलीं और उनका एथलेटिक्स करियर आगे बढ़ा। गुलवीर ने 2022 एशियन गेम्स में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5,000 और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में 27:49.78 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता। वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बने। ऑस्ट्रेलिया के काइ रॉबिन्सन ने 27:48.93 के समय के साथ गोल्ड जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की ने ब्रॉन्ज हासिल किया। कॉमनवेल्थ गेम्स में गुलवीर ने 5,000 मीटर में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता। इससे पहले 2025 में उन्होंने 10,000 मीटर में 27:00.22 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था, जो वर्ल्ड एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में दर्ज है। एशियन गेम्स 2026 से पहले गुलवीर ने कहा था कि वह पिछली एशियन गेम्स की तुलना में अब खुद को ज्यादा आत्मविश्वास के साथ देख रहे हैं। वह आइची-नागोया में 1,500, 5,000 और 10,000 मीटर स्पर्धाओं में भारतीय चुनौती का हिस्सा हैं। गुलवीर सिंह की कहानी गांव के खेतों से अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स ट्रैक तक पहुंचने वाले एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी है, जिसने सेना में भर्ती की तैयारी से शुरू हुए सफर को राष्ट्रीय रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय पदकों तक पहुंचाया है।सेना में भर्ती होकर शुरू हुआ सफर
एशियन गेम्स में कांस्य से मिली पहचान
कॉमनवेल्थ गेम्स में रचा इतिहास
अब एशियन गेम्स पर नजर















