नई दिल्ली :  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मामले में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कांग्रेस शासित राज्यों में महिला मंत्रियों की संख्या को लेकर सवाल उठाए।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस वर्तमान में चार राज्यों में सरकार चला रही है, लेकिन इन सरकारों में महिलाओं को मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा।

हिमाचल और कर्नाटक में महिला मंत्री नहीं होने का दावा

भाजपा सांसद के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक की कांग्रेस सरकारों में कोई महिला मंत्री नहीं है। वहीं केरल में दो महिला मंत्री हैं।

उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना में दो महिला मंत्री थीं, जिनमें से एक को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया। त्रिवेदी के अनुसार, इस तरह चार राज्यों की कांग्रेस सरकारों में फिलहाल कुल तीन महिला मंत्री रह गई हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस महिला आरक्षण और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात करती है, तो उसकी अपनी राज्य सरकारों के मंत्रिमंडल में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिलता।

खरगे और राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि खरगे ने महिला आरक्षण कानून को परिसीमन की शर्त के बिना जल्द लागू करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। ऐसे में त्रिवेदी ने सवाल किया कि कांग्रेस की राज्य सरकारों में महिलाओं को मंत्रिमंडल में पर्याप्त स्थान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर है और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी का रुख केवल बयानबाजी तक सीमित है।

‘मन, वचन और कर्म में अंतर’

त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मामले में पार्टी मन, वचन और कर्म तीनों स्तरों पर विफल रही है। उन्होंने कहा कि नेताओं के सार्वजनिक बयानों और सरकारों के वास्तविक फैसलों में अंतर होने से राजनीति में विश्वसनीयता का संकट पैदा होता है। उनके मुताबिक कांग्रेस इस विरोधाभास का एक प्रमुख उदाहरण है।

महिला आरक्षण कानून को लेकर भी सियासत

भाजपा नेता का यह हमला ऐसे समय में आया है जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की समयसीमा और परिसीमन से जोड़ने के मुद्दे पर विपक्ष केंद्र सरकार पर दबाव बना रहा है। साल 2023 में संसद से पारित महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। इसके लागू होने को लेकर परिसीमन और जनगणना से जुड़े प्रावधानों पर राजनीतिक बहस जारी है।