जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई: खरनी में महापंचायत जैसा विरोध, भूख हड़ताल की तैयारी
तोपचांची (बाघमारा): धनबाद जिले के तोपचांची प्रखंड स्थित ढांगी पंचायत के खरनी गांव में पत्थर खनन को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। खेती योग्य जमीन, पारंपरिक जलस्रोतों और सार्वजनिक संपत्तियों पर खतरे का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विवादित खनन गतिविधियों पर रोक नहीं लगी और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल भी की जाएगी। ग्रामीणों का आरोप है कि घनी आबादी के बीच खेती योग्य जमीन पर पत्थर खनन किया जा रहा है। इससे न केवल कृषि भूमि प्रभावित हो रही है, बल्कि गांव के पारंपरिक जलस्रोतों और सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों पर भी संकट मंडराने लगा है। विरोध कर रहे लोगों के मुताबिक, खनन गतिविधियों के कारण श्मशान घाट, प्राकृतिक जलधाराओं यानी जोड़िया, अमृत सरोवर तालाब और ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि ये संसाधन गांव की पहचान और रोजमर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में इनके प्रभावित होने से स्थानीय लोगों के सामने भविष्य में गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उन्हें विकास या रोजगार के अवसरों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसकी आड़ में खेती की जमीन, जलस्रोतों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव के अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि यदि समय रहते जमीन और जलस्रोतों के संरक्षण के लिए आवाज नहीं उठाई गई, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है। ग्रामीणों के विरोध को जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी और सांसद प्रतिनिधि सुभाष रवानी ने भी समर्थन दिया है। दोनों ने ग्रामीणों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और शिकायतों का समाधान करने की बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने मामले में ठोस पहल नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल भी की जा सकती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अधिकारियों की एक टीम संबंधित स्थल का निरीक्षण करे और खेती योग्य जमीन, अमृत सरोवर, श्मशान घाट, प्राकृतिक जलधाराओं तथा ग्रामीण सड़कों की स्थिति का जायजा ले। इसके साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित स्थल पर खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों को और नुकसान पहुंचने की आशंका से बचा जा सके। खरनी गांव में पत्थर खनन को लेकर उठे विरोध ने अब प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण अपनी जमीन और जलस्रोतों के संरक्षण की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन गांव के अस्तित्व और प्राकृतिक संसाधनों की कीमत पर नहीं। फिलहाल ग्रामीणों ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन शिकायतों की जांच के लिए कब कदम उठाता है और ग्रामीणों की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है।खेती की जमीन और जलस्रोतों पर खतरे का आरोप
विकास के नाम पर गांव के संसाधनों से समझौता नहीं
सरिता देवी और सुभाष रवानी ने दिया समर्थन
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और खनन पर रोक की मांग
प्रशासन के सामने संरक्षण और कार्रवाई की चुनौती














