रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा को लेकर विवाद लगातार जारी है। परीक्षा रद्द किए जाने के बाद नौकरी गंवाने वाले चयनित अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बावजूद अगस्त महीने का वेतन अब तक नहीं मिल सका है।

हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2026 के आदेश में संबंधित चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल काम जारी रखने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद आदेश के करीब 19 दिन बाद भी कार्मिक विभाग की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट आधिकारिक पत्र जारी नहीं होने की बात सामने आ रही है।

इस वजह से नियुक्त अभ्यर्थियों के बीच वेतन को लेकर असमंजस बना हुआ है। ट्रेजरी नियमों के तहत संबंधित विभाग का स्पष्ट आदेश नहीं होने पर वेतन बिल पास कराने में परेशानी आती है। ऐसे में अब कार्मिक विभाग के आधिकारिक निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।

18 अगस्त को सरकार ने रद्द की थी परीक्षा

JSSC CGL विवाद ने उस समय नया मोड़ लिया, जब CID जांच में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को JSSC CGL समेत TDPL की 22 परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने की अधिसूचना जारी की।

इस फैसले का सीधा असर उन 1,932 अभ्यर्थियों पर पड़ा, जिन्हें 8 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नियुक्ति दी गई थी। नौकरी जाने के बाद अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया और बाद में हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने के फैसले पर लगाई अंतरिम रोक

नौकरी गंवाने वाले चयनित अभ्यर्थियों की याचिका पर 21 अगस्त 2026 को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने प्राकृतिक न्याय के आधार पर राज्य सरकार द्वारा परीक्षा और परिणाम रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी।

कोर्ट के आदेश के बाद चयनित अभ्यर्थियों को काम जारी रखने की अनुमति मिली। हालांकि, वेतन भुगतान को लेकर अभी भी विभागीय स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।

JSSC CGL विवाद की पूरी टाइमलाइन

21 जून 2023:
JSSC ने कुल 2,015 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए CGL परीक्षा का विज्ञापन जारी किया।

28 जनवरी 2024:
CGL परीक्षा आयोजित हुई। परीक्षा के दिन ही प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को लेकर विवाद शुरू हो गया।

4 फरवरी 2024:
प्रश्नपत्र लीक के आरोपों और अभ्यर्थियों के विरोध के बीच परीक्षा स्थगित कर दी गई।

सितंबर 2024:
परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पुनर्परीक्षा आयोजित की गई।

दिसंबर 2024:
पुनर्परीक्षा का परिणाम जारी किया गया।

जनवरी 2025:
परिणाम जारी होने के बाद असफल अभ्यर्थियों की ओर से धांधली के आरोप लगाए गए। मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा और अदालत ने अंतिम चयन सूची व नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी।

3 दिसंबर 2025:
लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 10 संदिग्ध अभ्यर्थियों का परिणाम रोकते हुए बाकी अभ्यर्थियों की मेरिट सूची जारी करने का निर्देश दिया।

8 दिसंबर 2025:
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 1,932 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन परिणाम जारी हुआ और उन्हें नियुक्ति दी गई।

5 जनवरी 2026:
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया।

जुलाई 2026:
परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग को लेकर असफल अभ्यर्थियों ने आंदोलन और अनशन शुरू किया।

22 जुलाई 2026:
CID ने मामले में मुख्य संदिग्ध बताए जा रहे पूर्व TDPL कर्मी अभय तिवारी को गिरफ्तार किया। उस पर परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने के कथित रेट चार्ट से जुड़े आरोप लगाए गए।

18 अगस्त 2026:
राज्य सरकार ने JSSC CGL समेत TDPL की 22 परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने की अधिसूचना जारी की। इससे दिसंबर 2025 में नियुक्त 1,932 अभ्यर्थियों की नौकरी प्रभावित हुई।

18 अगस्त 2026:
CID ने जांच आगे बढ़ाते हुए अभय तिवारी की पत्नी सुषमा और उसके भाई अक्षय को गिरफ्तार किया। JSSC सचिव सुधीर गुप्ता से भी पूछताछ की गई।

19 अगस्त 2026:
परीक्षा रद्द होने और नौकरी जाने के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों ने झारखंड मंत्रालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया। अभ्यर्थियों का कहना था कि उनकी नियुक्ति न्यायिक आदेश के बाद हुई थी और कई लोगों ने नियुक्ति के बाद अपनी पुरानी नौकरी तक छोड़ दी थी।

21 अगस्त 2026:
चयनित अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी और अभ्यर्थियों को काम जारी रखने की अनुमति दी।

24 अगस्त 2026:
JSSC CGL मामले की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

27 अगस्त 2026:
CID ने दिल्ली के बुराड़ी इलाके में कार्रवाई कर परीक्षा संचालन से जुड़े दो आरोपियों, सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया।

28 अगस्त 2026:
CID ने कथित तौर पर गलत तरीके से ASO पद पर चयनित चार अभ्यर्थियों—दीपक, उमेश, विजय और आनंद—को गिरफ्तार किया।

30 अगस्त 2026:
गिरिडीह के बेंगाबाद निवासी समीर कुमार को गिरफ्तार किया गया।

7 सितंबर 2026:
CID ने पटना से आरोपी राजन कुमार और कुंदन कुमार को गिरफ्तार किया। राजन पर आरोप है कि उसने कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित एक होटल में ले जाकर प्रश्न-उत्तर तैयार कराने में भूमिका निभाई।

8 सितंबर 2026:
हाईकोर्ट में नियुक्त अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने अंतरिम रोक जारी रखते हुए राज्य सरकार को 15 सितंबर 2026 तक अपना स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल वेतन का

हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद चयनित अभ्यर्थियों को काम जारी रखने की अनुमति तो मिल गई है, लेकिन अगस्त महीने के वेतन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। कार्मिक विभाग की ओर से आधिकारिक निर्देश जारी होने के बाद ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

ऐसे में अब अभ्यर्थियों की नजरें 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई और राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हैं। इसके साथ ही CID जांच में आगे होने वाली कार्रवाई भी इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम होगी।