हजारीबाग: शहर के जय प्रभा नगर में सार्वजनिक नाले की जमीन पर कब्जे और घेराबंदी की कोशिश का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासी प्रमिला देवी ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग जेसीबी लेकर पहुंचे और नाले की जमीन पर बाउंड्री वॉल बनाने की कोशिश की। महिला ने प्रशासन से मामले की जांच कराने और नाले को अतिक्रमणमुक्त रखने की मांग की है। वहीं, वार्ड पार्षद कैलाश कुमार ने कहा कि यह केवल एक महिला का मामला नहीं है, बल्कि इस संबंध में अन्य लोगों ने भी शिकायत की है।

जेसीबी से घेराबंदी की कोशिश का आरोप

जय प्रभा नगर की गली नंबर-6 निवासी प्रमिला देवी, पति भुवनेश्वर साह, का कहना है कि उनके घर के पीछे से गुजरने वाला नाला गली नंबर-4 की ओर जलनिकासी से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विनोद महतो, वीरेंद्र महतो, सीताराम यादव, मुक्तेश साह, गुड्डन पांडे, चित्ररंजन दास समेत कुछ अन्य लोग नाले की जमीन पर कब्जा करने और घेराबंदी करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रमिला देवी के मुताबिक, जमीन को लेकर उनसे 30 लाख रुपये में जमीन लेने की बात कही गई थी। उनके इनकार के बाद भी घेराबंदी की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित लोगों का पक्ष सामने आना बाकी है।

अधिकारियों से शिकायत, नापी कराने का दावा

प्रमिला देवी ने बताया कि उन्होंने उपायुक्त, अंचल कार्यालय, नगर निगम, पुलिस समेत संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। उनके अनुसार, जमीन की नापी के लिए सरकारी अमीन भी पहुंचे थे। महिला का कहना है कि नाले की जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से नाले की चौड़ाई और जलनिकासी व्यवस्था की जांच कराने तथा जमीन पर कथित अवैध निर्माण और बिक्री से जुड़ी शिकायतों की पड़ताल करने की मांग की है।

वार्ड पार्षद बोले- अन्य लोगों ने भी की शिकायत

वार्ड नंबर-4 के पार्षद कैलाश कुमार ने बताया कि नाले की जमीन पर कब्जे की शिकायत लेकर एक महिला उनसे मिली थीं। उनके मुताबिक, इस मामले में अन्य लोगों ने भी आवेदन दिया है।

पार्षद ने आरोप लगाया कि जय प्रभा नगर में नाले और आसपास की गैरमजरुआ आम जमीन पर कब्जा कर निर्माण करने और जमीन बेचने की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले को उपायुक्त, सदर अंचल अधिकारी, नगर निगम और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।

नाले का रास्ता बंद होने से जलजमाव की आशंका

स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि सार्वजनिक नाले का रास्ता बाधित होता है, तो आसपास के इलाकों में पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है। खासकर बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल, मामले में प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई की आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है। अब जमीन के राजस्व अभिलेखों, नाले की वास्तविक स्थिति और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित लोगों और प्रशासन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।