बड़गांई की 8.86 एकड़ जमीन का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, राजकुमार पाहन की याचिका पर ED को नोटिस
रांची: झारखंड की चर्चित बड़गांई जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में रैयत राजकुमार पाहन ने राहत के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 8.86 एकड़ जमीन से संबंधित इस मामले में उन्होंने PMLA की विशेष अदालत की ओर से डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने ED को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। ED की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा। अब मामले में ED के जवाब के बाद आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक राजकुमार पाहन की याचिका पर स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। दरअसल, बड़गांई जमीन मामले में PMLA की विशेष अदालत ने राजकुमार पाहन की डिस्चार्ज पिटीशन खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। डिस्चार्ज पिटीशन के जरिए आरोपी मुकदमे का सामना करने से मुक्त किए जाने की मांग करता है। ऐसी याचिका खारिज होने का अर्थ है कि संबंधित अदालत ने उस स्तर पर आरोपों से मुक्त करने की मांग स्वीकार नहीं की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में ED की विशेष अदालत राजकुमार पाहन, अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह समेत कुल 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन कर चुकी है। मामला बड़गांई की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच से संबंधित है। आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष और याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला आगे की कानूनी प्रक्रिया में अहम रहेगा।हाईकोर्ट में ED को जवाब दाखिल करने का निर्देश
PMLA कोर्ट ने खारिज की थी डिस्चार्ज पिटीशन
17 आरोपियों के खिलाफ हो चुका है आरोप गठन















