कर्नाटक: हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता, कर्नाटक की नन्ही स्वरश्री हेगड़े ने इसे साबित कर दिखाया है। महज 2 साल 10 महीने की उम्र में इस बच्ची ने तबले पर 12 अलग-अलग ताल बजाकर और उनके बोल सुनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। स्वरश्री की इस उपलब्धि को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली है। इतनी कम उम्र में भारतीय शास्त्रीय संगीत की लय को समझने और उसे तबले पर उतारने की उसकी क्षमता लोगों को हैरान कर रही है।

मंच पर तबला बजाती नन्ही कलाकार का वीडियो वायरल

उत्तर कन्नड़ जिले के होन्नावर की रहने वाली स्वरश्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में वह मंच पर बैठकर माइक के सामने तबला बजाती दिखाई देती है। खास बात यह है कि वह अलग-अलग तालों के बोल भी स्पष्ट रूप से सुनाती है और उन्हें तबले पर लय के साथ प्रस्तुत करती है।

नन्ही बच्ची की प्रस्तुति देखकर सोशल मीडिया यूजर्स उसकी तारीफ कर रहे हैं। इतनी कम उम्र में संगीत की बारीकियों को याद रखना और उन्हें ताल के साथ पेश करना लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

पिता तबला वादक, मां भी संगीत से जुड़ीं

स्वरश्री को संगीत की शुरुआती शिक्षा घर से ही मिली। उसके पिता गुरुराज हेगड़े तबला वादक और संगीत शिक्षक हैं, जबकि मां श्रीलता गायिका और अंग्रेजी की प्रोफेसर हैं। परिवार में संगीत का माहौल होने के कारण बच्ची को भी कम उम्र से ही ताल और लय के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिला।

माता-पिता के मुताबिक, स्वरश्री को करीब एक साल की उम्र से ही तबले में दिलचस्पी होने लगी थी। वह तबले को छूकर खुश होती थी और अपने पिता के पास बैठकर उसे बजाने की कोशिश करती थी। धीरे-धीरे उसकी यह रुचि अभ्यास में बदली और उसने अलग-अलग तालों को सीखना शुरू किया।

12 ताल याद रखना क्यों है खास?

भारतीय शास्त्रीय संगीत में ताल का महत्वपूर्ण स्थान है। ताल संगीत की लयबद्ध संरचना तय करती है और इसे सही ढंग से प्रस्तुत करने के लिए सुनने की क्षमता, स्मरण शक्ति, एकाग्रता तथा हाथों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होती है।

ऐसे में 2 साल 10 महीने की उम्र में 12 अलग-अलग तालों के बोल याद करके उन्हें तबले पर प्रस्तुत करना स्वरश्री की खास उपलब्धि है। उसकी यह प्रतिभा बताती है कि बच्चों की रुचि को समय रहते पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए, तो वे कम उम्र में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन कर सकते हैं।

नन्ही उम्र में बड़ी उपलब्धि, लोग कर रहे तारीफ

स्वरश्री की उपलब्धि के सामने आने के बाद लोग इसे उसके परिवार और उत्तर कन्नड़ जिले के लिए गर्व का विषय बता रहे हैं। संगीत की दुनिया में इतनी छोटी उम्र में उसकी पहचान बनना अपने आप में उल्लेखनीय है।

अब स्वरश्री की प्रतिभा का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। उसकी कहानी उन अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने बच्चों की रुचि पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना चाहते हैं।

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