बेंगलुरु:  कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई। पुनरीक्षण के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या घटकर 4,54,55,689 रह गई है। पहले राज्य में करीब 5.54 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। इस तरह पुरानी सूची की तुलना में लगभग 99.76 लाख मतदाताओं की संख्या कम हुई है।

मतदाता सूची के इस बड़े बदलाव के बाद अब नजर इस बात पर है कि पुनरीक्षण के दौरान किन श्रेणियों में नाम हटाए गए और कितने नए मतदाताओं को सूची में जगह मिली। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत नाम जोड़ने, हटाने और विवरण में सुधार के आवेदन भी निपटाए गए। 

SIR के बाद कितने मतदाता बचे?

कर्नाटक में पुनरीक्षण से पहले 5,54,32,314 मतदाता दर्ज थे। अंतिम सूची में इनकी संख्या 4,54,55,689 हो गई है। दोनों आंकड़ों के अंतर के आधार पर करीब 99.76 लाख मतदाताओं की संख्या कम हुई है।

हालांकि, मतदाताओं की कुल संख्या में कमी का अर्थ यह नहीं है कि हटाए गए सभी नाम अपात्र मतदाताओं के थे। SIR के दौरान मृत, स्थानांतरित, दोहरी प्रविष्टि वाले और सत्यापन में अनुपस्थित पाए गए मतदाताओं सहित अलग-अलग श्रेणियों की जांच की गई। 

नए मतदाताओं को भी मिला मौका

पुनरीक्षण के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण और मौजूदा विवरण में सुधार के लिए आवेदन लिए गए। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, करीब 6.83 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। वहीं, 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 86.56 लाख बताई गई है।

नाम कटने पर क्या कर सकते हैं मतदाता?

अगर किसी पात्र मतदाता का नाम अंतिम सूची में नहीं है, तो वह संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकता है। नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाता है। आवेदन ऑनलाइन मतदाता सेवा पोर्टल या संबंधित निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से किया जा सकता है।

मतदाता आयोग के पोर्टल पर अपना नाम और निर्वाचन क्षेत्र की जानकारी जांच सकते हैं। नाम सूची में नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना चाहिए।