हजारीबाग: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, हजारीबाग में कार्यरत एनएम, जीएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के तबादले को लेकर चल रहा विरोध फिलहाल थम गया है। सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने आंदोलनरत महिला स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उपायुक्त हेमंत सती से बातचीत कर तबादला आदेश पर रोक लगाने की मांग की। विधायक के अनुसार, उपायुक्त की पहल के बाद संबंधित तबादला आदेश निरस्त कर दिया गया है। हालांकि, आदेश निरस्त किए जाने की आधिकारिक लिखित पुष्टि सामने आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

करीब 350 स्वास्थ्यकर्मियों के तबादले पर जताई गई थी आपत्ति

स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, 24 अक्टूबर को जारी पत्र के तहत करीब 350 कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया था। इनमें एनएम, जीएनएम, एनआरएचएम और आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत कर्मी शामिल बताए गए हैं।

कर्मियों का कहना था कि कुछ स्वास्थ्यकर्मियों को 10 से 15 किलोमीटर, जबकि कुछ को 30 से 50 किलोमीटर दूर पोस्टिंग दी गई थी। महिला कर्मियों ने बताया कि छोटे बच्चों, बुजुर्ग माता-पिता और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच इतनी दूर जाकर ड्यूटी करना उनके लिए मुश्किल होगा।

चार माह से मानदेय नहीं मिलने की शिकायत

आंदोलनरत स्वास्थ्यकर्मियों ने यह भी शिकायत की कि उन्हें पिछले चार महीने से मानदेय नहीं मिला है। उनका कहना है कि वे वर्ष 2007 से कम मानदेय पर स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं और भुगतान लंबित होने के बावजूद सामूहिक तबादले का आदेश जारी कर दिया गया।

कर्मियों ने मांग की कि उनका लंबित मानदेय जल्द जारी किया जाए और पोस्टिंग ऐसी जगह की जाए, जहां वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ स्वास्थ्य सेवाएं भी सुचारू रूप से दे सकें।

विधायक बोले- जिम्मेदारी से काम करें, परेशानी में साथ रहूंगा

सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने स्वास्थ्यकर्मियों से कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी के साथ काम करती रहें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी तरह की समस्या होने पर वे उनके साथ खड़े रहेंगे।

विधायक ने कहा कि उनका उद्देश्य इस मामले में श्रेय लेना नहीं, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों की समस्या का समाधान कराना है। उन्होंने मामले में पहल करने के लिए उपायुक्त हेमंत सती के प्रति भी आभार जताया।

तबादला आदेश पर रोक की जानकारी से कर्मियों को राहत

तबादला आदेश पर रोक लगाए जाने की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने राहत जताई। उन्होंने कहा कि वे अपने निर्धारित कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखेंगी।

अब स्वास्थ्यकर्मियों की नजर लंबित मानदेय के भुगतान और तबादला आदेश की औपचारिक स्थिति पर है। आधिकारिक आदेश सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि स्थानांतरण आदेश किस स्तर तक निरस्त या स्थगित किया गया है।