रांची:  बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर कई राज्यों में मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। इसके 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट पर यनम के पास पहुंचने की आशंका है। मौसम प्रणाली के प्रभाव से तेज हवाओं और भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। इसका असर झारखंड में भी दिखने की संभावना है, जहां 28 और 29 अक्टूबर को कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

इस बीच लोगों के मन में सवाल है कि चक्रवात का नाम ‘अर्नब’ क्यों रखा गया और तूफानों के नाम तय करने की प्रक्रिया क्या है? आइए, जानते हैं।

‘अर्नब’ नाम का क्या है मतलब?

चक्रवात ‘अर्नब’ का नाम बांग्लादेश ने दिया है। यह उत्तरी हिंद महासागर में बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए तय नामों की सूची में शामिल है। इस नाम का उच्चारण ‘ओरनाब’ बताया जाता है। बंगाली भाषा में ‘अर्नब’ का अर्थ समुद्र या महासागर होता है।

चक्रवातों को नाम देने का उद्देश्य सिर्फ उनकी पहचान करना नहीं है। नाम होने से मौसम विभाग, प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम लोगों के लिए चेतावनियों को समझना, साझा करना और किसी खास तूफान पर चर्चा करना आसान हो जाता है।

कैसे तय होते हैं चक्रवातों के नाम?

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया एवं प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) के क्षेत्रीय चक्रवात पैनल के तहत तय किए जाते हैं।

इस क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की व्यवस्था 2004 में शुरू हुई थी। मौजूदा सूची में 13 देश शामिल हैं। इनमें भारत, बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं।

इन देशों की ओर से नामों की सूची तैयार की जाती है और तय क्रम के अनुसार उनका इस्तेमाल किया जाता है। किसी चक्रवात को नाम तभी दिया जाता है, जब वह निर्धारित मौसम वैज्ञानिक मानदंडों पर खरा उतरता है।

चक्रवात का नाम तय करने में IMD की भूमिका

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अंतर्गत नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) उत्तरी हिंद महासागर में बनने वाले चक्रवातों की निगरानी करता है और निर्धारित मानदंड पूरे होने पर उन्हें सूची के अनुसार नाम देता है।

नामकरण से अलग-अलग चक्रवातों की पहचान स्पष्ट रहती है। इससे मौसम संबंधी चेतावनियां जारी करने और संभावित खतरे के बारे में समय पर सूचना पहुंचाने में भी मदद मिलती है।

आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने की आशंका

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात ‘अर्नब’ के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यनम के तट पर बापटला तथा विशाखापत्तनम के बीच पहुंचने की संभावना है। इस दौरान हवा की अधिकतम निरंतर गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा है। समुद्र में गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन ने संभावित प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई है और लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

झारखंड में कितना पड़ेगा चक्रवात का असर?

चक्रवात का केंद्र आंध्र प्रदेश के तट पर रहने की संभावना है, लेकिन इससे जुड़ी मौसम प्रणाली का प्रभाव झारखंड तक पहुंच सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 27 अक्टूबर को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य में 28 अक्टूबर को भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की आशंका है। 29 अक्टूबर को भी कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि 30 अक्टूबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

28 अक्टूबर को रांची समेत मध्य, दक्षिणी और उत्तर-पश्चिमी झारखंड के कई इलाकों में मौसम ज्यादा खराब हो सकता है। मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। अलग-अलग जिलों में बारिश और हवा की तीव्रता अलग रहने की संभावना है।

29 अक्टूबर को भी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। भारी बारिश से निचले इलाकों में जलजमाव, ग्रामीण सड़कों पर आवागमन में परेशानी और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर जिलेवार मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।

झारखंड के लोग किन बातों का रखें ध्यान?

  • गरज-चमक के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।

  • तेज हवा की आशंका को देखते हुए घरों की छतों पर रखी ढीली वस्तुओं को सुरक्षित कर लें।

  • बिजली के खंभों, टूटे तारों और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहें।

  • किसान खेतों में काम करने से पहले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखें।

  • यात्रा पर निकलने से पहले सड़क और रेल सेवाओं से जुड़ी ताजा जानकारी लें।